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पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
आमतौर पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं का वरà¥à¤—ीकरण उनकी कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ के तंतà¥à¤°, रासायनिक संरचना या गतिविधि के सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® के आधार पर होता है। अधिकांश पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारà¥à¤¯ या उनकी विकास पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर निशाना साधते हैं।[10] पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाà¤à¤‚, जो बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की कोशिका दीवार (पेनसिलिनà¥à¤¸, सेफ़à¥à¤²à¥‹à¤¸à¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¸) या कोशिका à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ (polymixins), या आवशà¥à¤¯à¤• जीवाणॠà¤à¤‚जाइम (quinolones, sulfonamides) पर लकà¥à¤·à¥à¤¯ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करती हैं, सामानà¥à¤¯à¤¤: जीवाणà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤• पà¥à¤°à¤•ृति की होती हैं। वे, जो पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सिंथेसिस, जैसे अमीनोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ोसाइडस, माइकà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤¡à¤¸ और टेटà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¤¿à¤¨à¥à¤¸ पर निशाना साधते हैं, आमतौर पर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• होते हैं[24] इसके अलावा अपने लकà¥à¤·à¥à¤¯ की खासियत पर आधारित वरà¥à¤—ीकरण à¤à¥€ होता है: जैसे "संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤•" विशेष पà¥à¤°à¤•ार के जीवाणà¥à¤“ं, जैसे गà¥à¤°à¥ˆà¤® निगेटिव, या गà¥à¤°à¥ˆà¤® पॉजिटिव जीवाणॠपर लकà¥à¤·à¥à¤¯ साधते हैं, जबकि वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• जीवाणà¥à¤“ं की à¤à¤• विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। पिछले कà¥à¤› वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं के तीन नठवरà¥à¤— निदान के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किये जा रहे हैं। इस तरह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• यौगिकों के नठवरà¥à¤—ों की खोज में 40 सालों का समय लगा है। इन नई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं के निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तीन वरà¥à¤— हैं: साइकà¥à¤²à¤¿à¤• लिपोपेपटाइडस (डेपà¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨), गà¥à¤²à¥€à¤¸à¤¾à¤‡à¤²à¤¸à¥€à¤•à¥à¤²à¤¾à¤‡à¤‚स (टीगेसाइकà¥à¤²à¤¿à¤¨), और ओकà¥à¤¸à¤¾à¤œà¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¨à¥‹à¤‚स (लाइनेजोलिड). टीगेसाइकà¥à¤²à¤¿à¤¨ à¤à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• है, जबकि दो अनà¥à¤¯ का उपयोग गà¥à¤°à¥ˆà¤®-पॉजिटिव संकà¥à¤°à¤®à¤£ के इलाज के लिठहोता है। इन घटनाओं को वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं की बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मापने के साधन की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ के रूप में देखा जा सकता है।
उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨
1939 में पहली बार फà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‡ और चैन के अहम पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के बाद से चिकितà¥à¤¸à¤¾ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं के महतà¥à¤µ के कारण इनकी खोज और उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठशोध की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिली है। उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µà¥‹à¤‚ की वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का निरीकà¥à¤·à¤£ और उनका परीकà¥à¤·à¤£ तथा संशोधन शामिल होता है। उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किणà¥à¤µà¤¨ (फरà¥à¤®à¥‡à¤‚टेशन) के जरिये, आमतौर पर मजबूत à¤à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤• तरीके से किया जाता है।
पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨
मौखिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• को निगलकर लिया जाता है, जबकि नसों के जरिये दिये जाने वाले पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गंà¤à¥€à¤° मामलों, जैसे गहराई तक फैले पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€à¤—त संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किये जाते हैं। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कà¤à¥€-कà¤à¥€ बाहर से à¤à¥€ किया जाता है, जैसे आंख में डाली जाने वाली दवाà¤à¤‚ या मरहम.
दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ
हालांकि आमतौर पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाओं को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और अचà¥à¤›à¥€ तरह सहन करने योगà¥à¤¯ माना जाता है, पर ये वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ हैं।[25] दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ कई तरह के, विविध रूपों वाले और पूरी तरह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• के उपयोग और लकà¥à¤·à¥à¤¯à¤¿à¤¤ किये जाने वाले सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µà¥‹à¤‚ पर निरà¥à¤à¤° होते हैं। नई दवाओं से उपचार के सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¾à¤‡à¤² कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से उपयोग की जा रही दवाओं जितने सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ नहीं है।[25] पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ बà¥à¤–ार और मिचली से लेकर फोटोडरà¥à¤®à¤¾à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ और à¤à¤¨à¤¾à¤«à¤¿à¤²à¤¿à¤•à¥à¤¸ जैसे बड़े à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ तक के रूप में दिख सकते हैं।[कृपया उदà¥à¤§à¤°à¤£ जोड़ें] आम रूप से दिखने वाले दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में से à¤à¤•दसà¥à¤¤ है, जो कà¤à¥€-कà¤à¥€ à¤à¤¨à¥‡à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤• बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® कà¥à¤²à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¡à¤¿à¤¯à¤® डिफिसाइल के कारण होते हैं और यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आंत के फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾ के सामानà¥à¤¯ संतà¥à¤²à¤¨ को असà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ करने से होता है।[26] रोग पैदा करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की इस तरह अतिवृदà¥à¤§à¤¿ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• लेने के दौरान पà¥à¤°à¥‹-बायोटिक की खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने खतà¥à¤® किया जा सकता है।[कृपया उदà¥à¤§à¤°à¤£ जोड़ें] पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• के कारण उन जीवाणà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ बढ़ सकती है जो सामानà¥à¤¯ रूप से योनि के फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾ के घटक के रूप में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होते हैं और इससे वोलà¥à¤µà¥‹à¤‚-योनि कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जीनस कैंडीडा खमीर की पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ विकास हो सकता है।[27] दूसरी दवाओं के साथ अंतरकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ से दूसरे पारà¥à¤¶à¥à¤µ कà¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ à¤à¥€ दिख सकते हैं, जैसे पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€à¤—त कोरà¥à¤Ÿà¥€à¤•ोसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¾à¤¯à¤¡ के साथ à¤à¤• कà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥‹à¤²à¥‹à¤¨ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• लेने से कणà¥à¤¡à¤°à¤¾ (मांशपेशी को हडडी से जोड़ने वाली नस) की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ का जोखिम बढ़ जाता है ।
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